Tetnus(tetnus क्या है?)


Tetnus जिसे हिंदी में धनुस्तब्ध कहते जो की एक Bacterial Disease है और यह बहुत ही ख़तरनाक बीमारी है, इस बीमारी के bateria हवा मेंचारों तरफ फैले हुए हैं, यह बीमारी कटे हुए या किसी घाव के मिट्टी के संपर्क में आने से होता है।इस भयानक बीमारी से बचने के लिए अगर चोट लग जाये या कही छील जाए तो उसे तुरंत ही antiseptic(Detol, sevlon,etc)से धोवें और चोट अगर किसी जंग लगे लोहे से लगी हो ATS[anti tetnus serum] का प्रयोग डाक्टर की सलाह से करें

History of tetnus (Tetnus का इतिहास क्या है?)


पुराने समय में जब युद्ध घोड़ों और तलवारों से लड़े जाते तब हमे tetnus के इस जुवाणु के बारे में पता नही था और देखा गया कि सैनिक टुकड़ी इधर उधर पड़ी है।

और उनके जबड़े टेड़े हो गए तब से लोग मानने लगे कि जानरों और लोहे की हथियारों का का कुछ सम्बंद है ।बाद में खोज से पता चला कि यह बैक्टीरिया घोड़े की लिद में पाया जाता है।


Symptoms of टेटनस (
टेटनस के लक्षण क्या हैं?)

• स्थानीय टेटनस बैक्टीरिया से संक्रमित घाव के आसपास की मांसपेशियों को प्रभावित करता है,
• सिफेलिक टेटनस में शुरुआत में चेहरे की मांसपेशियां तेजी से प्रभावित होती हैं

(एक से दो दिन में)। यह आमतौर पर सिर पर चोट या कान में संक्रमण के कारण होता है।


• नीयोनेटल टेटनस सामान्य टेटनस जैसा ही होता है, लेकिन यह एक माह से कम उम्र के शिशुओं ,

(जिन्हें नीयोनेट कहा जाता है) को प्रभावित करता है। विकसित देशों में यह स्थिति बहुत कम होती है।


What is Reason of tetnus (टेटनस होने के क्या कारण है?)


• इस बीमारी का कारण एक है एक Bacteria(जीवाणु) है जिसका नाम क्लोस्ट्रीडियम टेटानी है।

इसका बैक्टीरिया मिट्टी, धूल या जानवरों के मल में रहता है ।और लगभग 60 साल जीवित रह सकता है।

ईसका बैक्टीरिया अत्याधिक तापमान भी सहन कर लेते हैं,


• टेटनस के बैक्टीरिया से, घावों का संक्रमित होना आम बात है।

टेटनस हालांकि तभी हो सकता है, जब बैक्टीरिया अपनी संख्या बढ़ा रहें हो और सक्रिय कोशिका बन रहें हो।


Active toxin of tetnus

1:- टेटानोलाइसिन

2:- टेटानोस्पैसमिन

टेटानोलाइसिन का काम अभी पता नहीं चल पाया है,

वैज्ञानिकों द्वरा माने तो टेटानोस्पैसमिन ही बीमारी के लिए असली जिम्मेदार है।

इस बिमारी का जीवाणु अपने होस्ट के शरीर में कहीं से भी कटे-जगहों से शरीर में जा सकता है।

टेटनस से संक्रमित हो सकनेवाले अन्य घावों में शामिल हैं:

शल्य चिकित्सा(Dermatologist)

पिसे हुए घाव(Accident)

छिलना

शिशु जन्म और(Delivery of the baby)

Injection injecting place

(Dead tissues) चोट , जलना या पिसना या बाहरी तत्वों के घाव में प्रवेश से टेटनस का खतरा बढ़ जाता है।

उन व्यक्तियों को भी टेटनस हो सकता है,

जिन्हें इसका टीका नहीं लगा हो या फिर जो व्यक्ति इसकी बूस्टर खुराक नहीं ले रहे हों।

टेटनस के लक्षण क्या है?

खुजली, मांसपेशियों में खिंचाव, सूजन, कमजोरी या निगलने में कठिनाई सामान्य रूप से देखा गया है,

अक्सर चेहरे की मांसपेशियां सबसे पहले प्रभावित होती हैं। जबड़ों का जकड़ना आम बात है|

Opistonsa किसे कहते है?

मांसपेशियों में जकड़न लगातार बढ़ती है और पीठ की

मनपेसियो तक पहुंच जाती है और दर्द होने लगता है, जिसे Opistonas कहते हैं।

मांसपेशियों की जकड़न इतनी भयानक हो जाती है कि इससे हड्डियां

भी टूट सकती हैं और जोडे भी हिल सकते हैं।

• इस गंभीर अवस्था में बोलने और सांस लेने

की नली में जकड़न हो जाती है।

• स्थानीय टेटनस में घाव की जगह के आसपास की मांसपेशियों

में जकड़न पैदा होती है। यह स्थिति आगे चल कर सामान्य टेटनस में बदल सकती है,

• नीयोनेटल टेटनस सामान्य टेटनस के जैसा ही है।

अंतर केवल इतना है कि यह नवजात

शिशुओं को प्रभावित करता है। इससे नवजात बेचैन हो जाते हैं और उन्हें चूसने और निगलने में कठिनाई होती है,


टेटनस से कैसे बचें-:

Child’s hands on a rusty barbed wire in a sunny green blurry background

Vaccination द्वारा टेटनस से पूरी तरह बचाव संभव है।

चोट हुई जगह को तुरंत ही एंटीसेप्टिक (Detol and Sevlon, आदि) से धुलें।

बाद में Tetnus का vaccine जाकर के लगवाए।

Tetnus vaccination 1920 के वक़्त में शुरू किया गया

टेटनस टॉक्सॉयड सबसे सुरक्षित साबित हुआ है। टेटनस टॉक्सॉयड में निष्क्रिय टेटनस टॉक्सीन को रसायनों और temperature प्रभाव में लाकर

उसके जहरीले प्रभाव को कम किया जाता है, लेकिन इसके एंटीजिनिक प्रभाव को बरकरार रखा जाता है,

टेटनस टॉक्सॉयड किसी भी टीके के रूप में आमतौर पर आसानी से उपलब्ध है।

इसे बच्चों के सुरूवाती टीकाकरण के लिए डिप्थेरिया टॉक्सॉयड

और पर्टूसिस(काली खाशी) वैक्सीन ,DPT- (Diptheria partusis Tetnus)

और बड़ों तथा बच्चों के टीकाकरण के लिए कम किये हुए डिप्थेरिया टॉक्सॉयड (TD) के साथ मिलाया जा सकता है।

50 या उससे अधिक उम्र के वयस्कों में टीकाकरण की सिफारिश की जाती है,

क्योंकि हाल के दिनों में इस आयुवर्ग में टेटनस के कई मामले सामने आये हैं। इन लोगों में टेटनस की आशंका अधिक होती है:

गर्म और नम वातावरण वाले बाहरी देशों में जानेवाले।

धूल या गोबर की खाद के बीच काम करनेवाले किसान।

जो लोग ऐसा काम करते है जिनमे चोट लगने या काटने फटने का खतरा हो।

गर्भवती महिलाएँ, जिन्हें टीका नहीं दिया गया हो और जो स्वच्छ

माहौल में बच्चे का जन्म नहीं करती हैं। टीकाकरण के बाद भी

यह जीवाणु गर्भाशय के द्रव (Placenta) द्वारा मां से नवजात बच्चे में भी चले जाते हैं।

नोट: यह एक इंफोमेशनल ब्लॉग है जंग लगी वस्तुओं चोट लगने पर डॉक्टर ली सलाह लें!

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